27 साल पहले टीम इंडिया की जर्सी हो सकती थी केसरिया, इस वजह से चुना नीला रंग

साल 1992 के विश्व कप में क्रिकेट टीमें पहली बार कलरफुल जर्सी पहनकर मैदान पर उतरी थीं. सभी टीमें अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वजों को ध्यान में रखकर जर्सी का कलर तय कर रही थीं. टीम इंडिया के तत्काल प्रबंधक भी ऐसा ही कुछ करना चाहते थे, लेकिन तिरंगे का कोई भी रंग उसकी जर्सी पर न चढ़ सका.
भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के राष्ट्रीय ध्वज का रंग हरा था. पाकिस्तान इस रंग के लिए पहले ही प्रस्ताव पास करा चुका था. वैसे भी भारत ने इस रंग की जर्सी में कोई खास दिलचस्पी भी नहीं दिखाई थी. जबकि केसरिया रंग देश की एक विशेष राजनीतिक पार्टी और कई क्षेत्रीय दलों की ओर संकेत करता था. इस वजह से टीम इंडिया की जर्सी को यह रंग नहीं दिया गया.
बात करें सफेद रंग की तो एकदिवसीय क्रिेकेट मैच में काफी पहले से इस कलर की जर्सी पहनी जा रही थी. इसलिए दूसरे देशों की तरह भारत भी एक खिलते रंग की जर्सी चाहता था.
आखिरकार भारत ने ब्लू कलर की जर्सी लेने का फैसला किया. इसके पीछे की वजह थी राष्ट्रीय ध्वज में मौजूद अशोक चक्र. तिरंग में मौजूद 24 तीलियों वाले अशोक चक्र का रंग नीला होता है. इस वजह से टीम इंडिया की जर्सी को नीला रंग देने पर सहमति बनी और आज तक जर्सी पर यही रंग कायम है.
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